//प्रेम एवं मोह//
प्रेम अथवा प्यार दोनों ही ढाई अक्षर के हैं अर्थात दोनों ही अपूर्ण है।किन्तु किसी महात्मा ने इसी प्रेम को ज्ञान का आधार बताया है।
पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ ,पण्डित भया न कोई ।
ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़ें सो पण्डित होय।।
इस दोहे का भावार्थ भले ही जो भी हो किन्तु इस दोहे को स्कूली बच्चे कुछ ज्यादा ही गम्भीरता से ले लिये और जुट गये हैं इसे चरितार्थ करने में ।
जिस उम्र में इन्हें अपने नाक साफ करने चाहिए उस उम्र मे ये अपने बाबू-सोना को माफ कर रहे हैं ।गलती इनकी नहीं है या फिर ये कहे की गलती किन्ही की नहीं है ,भाई दौर ही यही है।
जिस उम्र में इन्हें शक्तिमान, सोन-परी देखने थे उस उम्र में ये video mute करके देख रहें हैं और यदि कोई हमारे जैसा सरसों मे राय है भी तो वो नोबिता-सुजुका(dorimon)को देख रहा है।
किसी बालक की बाल शका-लका बूम-बूम पेन्सिल जैसी हो तो बस हो गया बालिकाओं को प्यार ।किसी बालिका ने लाल रंग के वस्त्र धारण किये नहीं की योद्धाओं को प्रेम होते देर न लगती और फिर निकल पडते युद्ध पर विजय प्राप्त करने।कभी-कभी यह युद्ध दिखता तो सरल है किन्तु होता पृथ्वीराज चौहान के जैसा जिसको जीतना आसान नहीं होता, केवल धोखे से ही इसे जीता जा सकता है।
प्रेम अथवा प्यार दोनों ही ढाई अक्षर के हैं अर्थात दोनों ही अपूर्ण है।किन्तु किसी महात्मा ने इसी प्रेम को ज्ञान का आधार बताया है।
पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ ,पण्डित भया न कोई ।
ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़ें सो पण्डित होय।।
इस दोहे का भावार्थ भले ही जो भी हो किन्तु इस दोहे को स्कूली बच्चे कुछ ज्यादा ही गम्भीरता से ले लिये और जुट गये हैं इसे चरितार्थ करने में ।
जिस उम्र में इन्हें अपने नाक साफ करने चाहिए उस उम्र मे ये अपने बाबू-सोना को माफ कर रहे हैं ।गलती इनकी नहीं है या फिर ये कहे की गलती किन्ही की नहीं है ,भाई दौर ही यही है।
जिस उम्र में इन्हें शक्तिमान, सोन-परी देखने थे उस उम्र में ये video mute करके देख रहें हैं और यदि कोई हमारे जैसा सरसों मे राय है भी तो वो नोबिता-सुजुका(dorimon)को देख रहा है।
किसी बालक की बाल शका-लका बूम-बूम पेन्सिल जैसी हो तो बस हो गया बालिकाओं को प्यार ।किसी बालिका ने लाल रंग के वस्त्र धारण किये नहीं की योद्धाओं को प्रेम होते देर न लगती और फिर निकल पडते युद्ध पर विजय प्राप्त करने।कभी-कभी यह युद्ध दिखता तो सरल है किन्तु होता पृथ्वीराज चौहान के जैसा जिसको जीतना आसान नहीं होता, केवल धोखे से ही इसे जीता जा सकता है।
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